Total Pageviews

Showing posts with label kavita. Show all posts
Showing posts with label kavita. Show all posts

Saturday, April 13, 2013

कविता - "कहाँ हो कृष्ण"

कमल सों पुलकित तुम्हरे नैना,
मन को इन नैनं में चैना।
मुरली से जब स्वर रस निकले,
कृष्णं-वन्दम सृष्टि करे तब।
जग-जग माटी, पग-पग पाथर,
कैसे निकलूं चक्र से बाहर?
जो तुम अपनी दृष्टि बिखेरो,
द्वार खुलें सब, जागे ये मन।

धर्म से कर्म के पुल हैं गिरधर,
मानस पे अंकित मुरलीधर।
प्रेम से तत्व का ज्ञान दिलाते,
कृष्ण सभी को राह दिखाते।
युग-युग आकर, कण-कण छूकर,
कृष कर दो मन के सब अंतर।
सब रंग तुमसे, सब रस तुमसे,
स्वयं से निर्मल, तुम्हीं हो भगवन।

कहाँ हो कृष्ण, कहाँ हो गिरधर ?